गोरखपुर । फिरदौस जामा मस्जिद जमुनहिया बाग में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी महफिल हुई। अध्यक्षता मौलाना अनवर अहमद तनवीरी ने व संचालन शहजाद अहमद ने किया। नात-ए-पाक मो. फरहान क़ादरी ने पेश की।
मुख्य अतिथि कारी मोहम्मद अफरोज़ निज़ामी ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी पर अर्श से लेकर फर्श तक खुशियां मनाई जाती है। इंसानों की रहनुमाई के लिए 12 रबीउल अव्वल यानी 20 अप्रैल सन् 571 ई. में अरब के मक्का शहर में पैग़ंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्म हुआ। वालिद का नाम हज़रत अब्दुल्लाह रदियल्लाहु अन्हु था। पैग़ंबर-ए-आज़म की ज़ाहिरी जिंदगी तिरसठ (63) बरस की हुई। वालिद का इंतकाल विलादत से पहले हो गया। जब आपकी उम्र 6 साल की हुई तो वालिदा हज़रत आमिना रदियल्लाहु अन्हा का इंतक़ाल हो गया। जब आपकी उम्र 8 साल की हुई तो दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिब रदियल्लाहु अन्हु का इंतक़ाल हो गया। जब आपकी उम्र 12 साल की हुई तो आपने मुल्के शाम का तिजारती सफ़र किया और 25 साल की उम्र में मक्का की एक इज्ज़तदार ख़ातून हज़रत ख़दीजा रदियल्लाहु अन्हा के साथ निकाह फ़रमाया और 40 साल की उम्र में ऐलान-ए-नुबूवत फ़ारान की चोटी से फ़रमाया और 53 साल की उम्र में हिजरत की। आपने अल्लाह के पैग़ाम को पूरी दुनिया में पहुंचाया। आपका मजारे मुबारक मदीना शरीफ में है जहां पर आशिक-ए-रसूल जियारत कर फैज़याब होते हैं।
पैग़ंबर-ए-आज़म के कब्र अनवर का अंदरूनी हिस्सा, जो आपके जिस्म अतहर से लगा हुआ है वह काबा शरीफ व अर्श-ए-आज़म से भी अफ़ज़ल है।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान की दुआ मांगी गई। जलसे में हाजी लजीज, आसिफ महमूद, एजाज, इरशाद आदि अकीदतमंदों ने शिरकत की।


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