गोरखपुर। ग़ौसे आज़म हज़रत शैख़ अब्दुल कादिर जीलानी अलैहिर्रहमां की याद में मियां बाज़ार व शाहिदाबाद गोरखनाथ में जलसा हुआ। क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। नात-ए-पाक पेश की गई।
मुख्य अतिथि मौलाना मोहम्मद अहमद निज़ामी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम को इंसान ने बड़ी तेजी के साथ कुबूल किया है। आज दीन-ए-इस्लाम दुनिया का सबसे ज्यादा मकबूल धर्म बन गया है और किसी एक तबके, नस्ल या गिरोह, इलाके के नहीं बल्कि सारी दुनिया में हर नस्ल, हर इलाके, हर तबके के लोग दीन-ए-इस्लाम से वाबस्ता हो रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि मौलाना तफज़्ज़ुल हुसैन रज़वी ने कहा कि आज अगर अहले इस्लाम, इस्लाम के उसूल व क़ानून की पाबंदी करके सही मायने में मुसलमान बन जाएं तो दुनिया में जो लोग अभी दीन-ए-इस्लाम की लज़्ज़त से नावाकिफ हैं वह सब दीन-ए-इस्लाम के दामन से वाबस्ता हो जायेंगे। नेक बनें एक बनें। तालीम हासिल करें। शरीअत की पाबंदी करें।
अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान की दुआ मांगी गई। जलसे में हाफ़िज़ शहीद, हाफ़िज़ एमादुद्दीन, हाफ़िज़ महमूद रज़ा क़ादरी, मो. हबीब अली, सद्दाम अली, युसूफ अली, फरहान अली, रज़ा अली, इरशाद आलम, जावेद अली, फैज़ अली, शहजाद अली, इस्लाम अली, हाफ़िज़ अज़ीम अहमद नूरी, मो. आरिफ रज़ा, मौलाना शाबान, मौलाना इम्तियाज़ अहमद आदि ने शिरकत की।


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