गोरखपुर। मोहल्ला नखास में जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी हुआ। क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत कारी नसीमुल्लाह ने की। नात-ए-पाक नसीम सलेमपुरी व सुम्बुल हाशमी ने पेश की।
मुख्य अतिथि मौलाना जहांगीर अहमद अज़ीज़ी ने कहा कि क़ुरआन-ए-पाक में अल्लाह फरमाता हैं कि ष्बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते दरूद भेजते हैं उस ग़ैब बताने वाले नबी (हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर। ऐ ईमान वालों! उन पर दरूद और सलाम भेजोष्। दरूद व सलाम एक ऐसी अनोखी और बेमिसाल इबादत है जो रज़ा-ए-इलाही और नबी-ए-पाक हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से करीब होने का जरिया है। इस मक़बूल तरीन इबादत के ज़रिए हम बारगाह-ए-इलाही से बरकत हासिल करते हैं। कोई इबादत ऐसी नहीं हैं जिसकी कुबूलियत का मुकम्मल यकीन हो, जबकि दरूद व सलाम एक ऐसी इबादत और नेक अमल है, जो हर हाल में अल्लाह की बारगाह में मक़बूल है। दरूद शरीफ दुआ की कुबूलियत का जरिया हैं। दरूद शरीफ़ के जरिए अल्लाह बंदों के ग़मों को दूर करता है। दरूद शरीफ तंग दस्त के लिए निजात का जरिया है। दरूद व सलाम पढ़ने वाले को इस अमल की वजह से उसकी ज़ात, अमल, उम्र और बेहतरी के असबाब में बरकत हासिल होती है। एक बार दरूद शरीफ पढ़ने वाले पर दस रहमतें उतरती है। उसके लिए दस नेकियां लिखी जाती है, उसके दस गुनाह मिटाए जाते हैं।
अंत में सलातो-सलाम पढ़कर दुआ-ए-खैर व बरकत मांगी गई। जलसे में हाफ़िज़ सेराज, इरशाद अहमद, आदिल अत्तारी, हाफ़िज़ इसराक, जावेद सिमनानी, शोएब सिमनानी, खुर्शीद, तबरेज, शहनवाज़, मो. कैस, अहमद खान, इमरान, अब्दुर्रहमान, रेहान रज़ा, हयातउल्लाह, अय्यूब निज़ामी, जियाउर्रहमान, अबू अहमद, उबैदुर्रहमान, मसुदूल हसन, शुएब अंसारी, शाह आलम आदि मौजूद रहे।


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