सिसवा बाजार-महराजगंज। सिसवा विकास खण्ड के ग्राम रूद्रापुर में परफारमेंस ग्रांट के पैसे से बनी सीसी सड़क टूटने लगी है, लेकिन किसी अधिकारी की नींद नही खुली जिससे भ्रष्टाचार का खेल जारी है, ऐसे ही जू0हा0 स्कूल में इंटरलाकिंग निर्माण के दौरान घटिया किस्म के ईंटों के प्रयोग के साथ ही बालू की जगह पीली मिट्टी वाली बालू डाली गयी, मामला खुलने लगा तो काम में तेजी आ गयी, लेकिन अधिकारी अंजान बने है, ऐसे हो रहा है गांव का विकास।

बताते चले सिसवा विकास खण्ड के ग्राम रूद्रापुर में परफारमेंस ग्रांट से करोड़ों रूपये खर्च कर गांव की तस्वीर बदली जा रही है, सीसी सड़कों के साथ इंटरलाकिंग सड़कों का निर्माण, स्कूलों, आंगनबाड़ी व पंचायत भवन का कायाकल्प किया जा रहा है, यानी करोड़ों रूपये निर्माण कार्यों पर खर्च किया जा रहा है, लेकिन जिस तरह निर्माण कार्यों की आंड़ में भ्रष्टाचार मचा हुआ है उससे तो यही लगता है गांव की तस्वीर भले ही न बदले लेकिन तस्वीर बदलने वालों की तस्वीर जरूर बदल जाएगी।
Big news: open game of corruption in the name of development, know what is the whole matter!
ग्राम रूद्रापुर में PWD से गंगौली सीवान से ओमप्रकाश के खेत तक सीसी रोड़ के निर्माण पर 17-08-2022 को 18 लाख रूपये का भुगतान हुआ है, यह हम नही बल्कि वेबसाइड पर दर्ज आंकड़ा बता रहा है, इस सीसी सड़क की मजबूती देखे तो पता चलेगा कि निर्माण के दौरान किस तरह भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है, मानक की धज्जियां उड़ाई गयी हैं तभी तो सीसी सड़क की गिट्टीयां उजड़ने के साथ ही टूटने लगी है।
इस नवनिर्मित सीसी सड़क पर कोई बड़ा वाहन नही चलता बल्कि गांव के अन्दर जाने वाली सड़क है, जो खेतों के बीच से जाती है, ऐसे में पैदल, साईकिल, बाइक व खेती के कार्यों के लिए ट्रेक्टर व ट्राली ही आते-जाते होंगे, कोई ट्रक या बस नही जाती है, लेकिन नव निर्मित सीसी सड़क की बनने के साथ ही गिट्टीया उजड़ने लगी है, और सड़क टूटने भी लगी है।

जब कि सड़कों के निर्माण के लिए कि सड़क अच्छी और मजबूत हो मानक का ध्यान रख्ा जाता है उसी हिसाब से लागत निकाली जाती है, तब जा कर सड़को का निर्माण होता है, लेकिन यहां तो लागत अच्छी सड़क वाली है और बनने के बाद ही भ्रष्टाचार के खेल को उजागर कर दिया।
इस ग्राम सभा में यह कोई पहली सड़क है जिसमें मानक की धज्जियां उड़ाई गयी है, जू0हा0स्कूल के प्रांगण में भी इंटरलाकिंग सड़क बनायी गयी, उस समय भी मानक की जमकर धज्जियां उड़ाई गयी, उस में तीन नम्बर की घटिया ईंटों का प्रयोग किया गया तो वही ऐसी पीली बालू डाली गयी जिसमें बालू कम मिट्टी ज्यादा थी।

ऐसा नही कि इस भ्रष्टाचार के खेल को यहां के अधिकारी नही जानते बल्कि वह अंजान बने रहते है और विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल होता रहता है।


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