April 25, 2024

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Aam Budget 2023: वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का दावा, सबकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा बजट, सरकार ने हमेशा जनहित में किया हैं काम

Aam Budget 2023: वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का दावा, सबकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा बजट, सरकार ने हमेशा जनहित में किया हैं काम

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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि इस बार का आम बजट समाज के हर वर्ग की उम्मीदों पर खरा उतरेगा. पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने हमेशा देश की जनता के हित में काम किया है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि इस बार का बजट समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए आम जनता की उम्मीदों के अनुरूप होगा. चौधरी ने कहा कि चुनाव तो आते रहते हैं. 2023-24 के बजट में चुनावों पर नहीं बल्कि लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

Aam Budget 2023: Minister of State for Finance Pankaj Chaudhary claims, the budget will live up to everyone’s expectations, the government has always worked in the public interest

बजट आज संसद में पेश होने वाला है. इससे पहले केंद्र सरकार ने मंगलवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण को पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण चालू वित्त वर्ष 2022-23 (अप्रैल-मार्च) में अर्थव्यवस्था की स्थिति और विभिन्न संकेतकों और अगले वर्ष के लिए दृष्टिकोण के बारे में जानकारी देता है. इकोनॉमी सर्वे से आज पेश होने वाले 2023-24 के आम बजट के बारे में भी कुछ संकेत मिलते हैं. इस बार का बजट 2024 के अप्रैल-मई में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव के पहले पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार का आखिरी पूर्ण बजट हो सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण सुबह 11 बजे शुरू होगा. आम बजट 2023 से व्यक्तियों के लिए आयकर में राहत मिलने के अलावा अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को बढ़ावा देने के उपायों को तेज करने की भी उम्मीदें हैं. नीति निर्माता और उद्योग जगत के लोग अर्थव्यवस्था पर बजट के राजकोषीय असर और वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बजटीय विनिवेश के लक्ष्य पर भी नजर रखे हुए हैं. गौरतलब है कि पिछले साल, सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2022-23 के लिए कुल 65,000 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा था. इसमें से सरकार ने अब तक लगभग 31,000 करोड़ रुपये केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में अपनी इक्विटी बेचकर जुटाए हैं।

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