सिसवा बाजार-महराजगंज। सरकार विकास के लिए धन भेज रही है लेकिन यहां तो विकास के नाम पर लूट मची हुयी है, आज हम ऐसे पुलिया को दिखा रहे है कि उस पुलिया को देख कर आप भी इंजिनियर के साथ ही पुलिया बनवाने वाले को भी सलाम करेंगे, ऐसा इंजिनियरिंग का नमूना सिसवा क्षेत्र में ही देखने को मिलेगा, पुलिया ऐसी बनी है कि उस का कोई मतलब ही नही है, आप उस पर चढ़ भी नही सकते, आगे का कोई रास्ता भी नही दिखाई दे रहा है लेकिन लाखों रूपया खर्च कर दिया गया।
यह पुलिया है सिसवा नगर पालिका अन्तर्गत खेसरारी में, इस पुलिया को देखने के बाद आप सोचने के लिए मजबूर हो जाएंगे कि आखिर इंजिनियर और ठेकेदार ने कैसा पुलिया बना दिया, खेसरारी व सिसवा खुर्द की सीमा पर बना यह पुलिया विधायक प्रेम सागर पटेल ने बनवाया है, क्यों कि इस पुलिस पर इन के शिलान्यास का पत्थर भी लगा हुआ है, पत्थर पर शिलान्यास का वर्ष 20218-19 लिखा हुआ है लेकिन वहां के लोगों के अनुसार इस पुलिया का निर्माण अभी पिछले छः माह पूर्व बरसात में हुआ है, ठीक है पुलिया तो बनी लेकिन उस पुलिया का कोई मतलब ही नही है, नगर सीधे है लेकिन पुलिया तिरछा बना हुआ है, एक तरफ से कच्ची रोड़ तो है लेकिन दूसरी तरफ खेत नजर आ रहा है, रही बात पुलिया पर चढ़ने की की तो आप कल्पना भी नही कर सकते और नहर के रास्ते ही आप इधर से उधर चले जाएंगे, क्यों की पुलिया के दोनों तरफ कोई एप्रोच ही नही बना है जिससे आप पुलिय पर चढ़ सके।
यानी जनता के आवागमन के लिए पुलिया तो बनी लेकिन एप्रोच नही बनने से जमीन से पुलिया आज भी पांच से छः फिट उंचाा है ऐसे में क्या कोई कूद कर पुलिय पर चढ़ेगा?
इस पुलिय को जिस तरह बनाया गया है वास्तव में लोग इंजिनियर ही नही ठेकेदार को भी बधाई दे रहे है कि चलों इनकी सोच ने सरकार के लाखों रूपये खर्च भले ही कर दिये लेकिन जनता का कोई फायदा नही हो रहा है, ऐसे में इंजिनियर व ठेकेदार को सलाम करने का जरूर मन करेगा।
वैसे इस तरह की पुलिया बनवाने वाले इंजिजियर व ठेकेदार द्वार बनवाए गये अन्य सभी पुलिया की जांच की जाए तो हो सकता है ऐसे तमाम और पुलिया मिल सकते है जिसका एप्रोच ही नही बना हो और सरकार के लाखों खर्च कर डाले गये।


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