गोरखपुर। बेनीगंज मस्जिद ईदगाह रोड में हज़रत सैयदना इमाम हुसैन सहित कर्बला के शहीदों की याद में मजलिस हुई। क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। नात व मनकबत पेश की गई।
कारी मो. शाबान बरकाती व मौलाना मो. फिरोज निज़ामी ने मजलिस में कहा कि जालिम यजीद के अत्याचार बढ़ने लगे तो उसने पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के प्यारे नवासे हज़रत सैयदना इमाम हुसैन से अपने कुशासन के लिए समर्थन मांगा और जब हज़रत इमाम हुसैन ने इससे इंकार कर दिया तो उसने हज़रत इमाम हुसैन को कत्ल करने का फरमान जारी कर दिया। कर्बला के तपते रेगिस्तान में तीन दिन के भूखे प्यासे हज़रत इमाम हुसैन व उनके जांनिसारों को शहीद कर दिया गया। अहले बैत पर बेइंतहा जुल्म किए गए। इस दर्दनाक दास्तान को सुनकर बड़े-बड़े बहादुरों के दिल हैबत से कांप जाते हैं। अगर हज़रत इमाम हुसैन की जगह रुस्तमे वक्त भी होता तो यह सदमा बर्दाश्त न कर पाता, लेकिन हज़रत इमाम हुसैन के कदमों में लग्जिश तक न आई। आपने अपनी व अपने जांनिसारों की क़ुर्बानी देकर दीन-ए-इस्लाम को बचा लिया। इमाम हुसैन, उनकी औलाद व जांनिसारों की क़ुर्बानी को रहती दुनिया तक मुसलमान भुला नहीं सकते।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में खुशहाली व अमन की दुआ मांगी गई, शीरीनी बांटी गई।
मजलिस में कारी अनीस, कारी अफ़ज़ल, शमीम अहमद, अकबर अली, सैयद साकिब, तालिब शेख, नदीम अहमद, इजहार खान, इब्राहीम, वसीम अहमद आदि ने शिरकत की।



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