गोरखपुर। तालीमात-ए-उम्मत फाउंडेशन के अध्यक्ष हाफ़िज़ रहमत अली निज़ामी ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि 9वीं व 10वीं मुहर्रम को सभी लोग रोजा रखें। इबादत करें। 9वीं व 10वीं मुहर्रम का रोजा रखने की हदीस में बहुत फज़ीलत आई है। 9वीं व 10वीं मुहर्रम दोनों दिन का रोजा रखना अफ़ज़ल है।
हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास से रिवायत है कि पैगंबर-ए-आज़म हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम मदीना तशरीफ लाए तो यहूदियों को आशूरा (10 मुहर्रम) के दिन रोजा रखते हुए देखा। आपने उनसे फरमाया यह कैसा दिन है कि जिसमें तुम लोग रोजा रखते हो? उन्होंने कहा यह वह अज़मत वाला दिन है जिसमें अल्लाह ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और उनकी कौम को फ़िरऔन के जुल्म से निज़ात दी और उसको उसकी कौम के साथ दरिया में डुबो दिया। हज़रत मूसा ने उसी के शुक्रिया में रोजा रखा, इसलिए हम भी रोजा रखते हैं। पैगंबर-ए-आज़म ने फरमाया हज़रत मूसा की मुवाफिकत करने में तो तुम्हारी बनिस्बत हम ज्यादा हकदार हैं। चुनांचे पैगंबर-ए-आज़म ने खुद भी आशूरा का रोजा रखा और सारी उम्मत को उसी दिन रोजा रखने का हुक्म दिया। मुसनद इमाम अहमद अैार बज्जाज में हज़रत इब्ने अब्बास से मरवी है कि पैगंबर-ए-आज़म ने फरमाया यौमे आशूरा का रोजा रखो और उसमें यहूद की मुख़ालफत करो यानी 9वीं और 10वीं मुहर्रम दोनों दिन रोजा रखो।
हाफ़िज़ महमूद रज़ा क़ादरी ने बताया कि 9वीं मुहर्रम (19 अगस्त) को सहरी का आख़िरी वक्त सुबह 4रू08 बजे व इफ़्तार का वक्त शाम में 6; 30 बजे है। वहीं 10वीं मुहर्रम (20 अगस्त) को सहरी का आख़िरी वक्त सुबह 4;09 बजे व इफ़्तार का वक्त शाम में 6;29 बजे है।



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