रायबरेली। ब्लाक क्षेत्र की मलिकमऊ चौबारा ग्राम पंचायत में कोटेदार के चयन को लेकर सोमवार को बुलाई गई खुली बैठक एक बार फिर, भारी हंगामे और नोक झोंक की भेंट चढ़ गई। बैठक का संचालन कर रहे सरकारी मुलाजि़मों की कार्यशैली से खफा ग्राम प्रधान व अनेक ग्राम पंचायत सदस्य बैठक छोड़ कर चले गये। ग्राम प्रधान के पति व प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि सरकारी कर्मचारियों ने किसी दबाव व प्रभाव में काम कर रहे थे। यद्यपि बाद में एडीओ समाज कल्याण व नायब तहसीलदार ने मिलकर बैठक की कार्यवाही लिखायी।
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खास बात यह है कि जिस पंजिका में कार्यवाही लिखी गई उसमे पहले से ही अनेक लोगों के हस्ताक्षर या अँगूठे के निशान दर्ज थे। मलिकमऊ चौबारा में रानी त्रिवेदी के प्रधान चुने जाने के बाद, उनके पति विनोद त्रिवेदी से कोटे की दूकान छिन गई थी, इसलिए यहाँ नये कोटेदार का चयन किया जाना है। आरक्षण के तहत अब, मलिकमऊ चौबारा में अनसूचित जाति का कोटेदार चुना जाना है।
इसके लिए पहली खुली बैठक बीती आठ सितम्बर को बुलाई गयी, लेकिन कोरम के अभाव में निरस्त कर दी गई। सोमवार को दूसरी बार फिर बैठक बुलाई गयी। चार लोगों ने कोटे की दूकान चलाने के लिए आवेदन किया, जिसमें निर्बल स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुन्दारा देबी, मलिकमऊ चौबारा निवासी राजू पुत्र पंचम, राम शंकर पुत्र बिन्दादीन व विशाल पुत्र सुखीलाल शामिल रहे।
इसके लिए पहली खुली बैठक बीती आठ सितम्बर को बुलाई गयी, लेकिन कोरम के अभाव में निरस्त कर दी गई। सोमवार को दूसरी बार फिर बैठक बुलाई गयी। चार लोगों ने कोटे की दूकान चलाने के लिए आवेदन किया, जिसमें निर्बल स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुन्दारा देबी, मलिकमऊ चौबारा निवासी राजू पुत्र पंचम, राम शंकर पुत्र बिन्दादीन व विशाल पुत्र सुखीलाल शामिल रहे।
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चयन प्रक्रिया का संचालन कर रहे एडीओ समाज कल्याण राम बहादुर यादव, नायब तहसीलदार ब्रजेश सिंह व ग्राम पंचायत अधिकारी शैलेन्द्र पटेल ने सुन्दारा देबी को शैक्षिक रूप से अयोग्य व उनके स्वयं सहायता समूह को निष्क्रिय बताते हुये उनके आवेदन को निरस्त कर दिया, जबकि राजू पुत्र पंचम ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। मैदान मे बचे राम शंकर व विशाल के बीच शक्ति परीक्षण कराने की तैयारी की गई। कोटे के दावेदार राम शंकर ने दोनो लोगो के बीच चुनाव कराने की माँग की, लेकिन चयन प्रक्रिया संचालित कर रहे सरकारी अमले ने मना कर दिया और समर्थकों की गणना के आधार पर चयन करने की बात कही।
राम शंकर चुनाव की माँग पर अड़े रहे, लेकिन जब उनकी माँग नहीं मानी गयी तो राम शंकर समेत ग्राम प्रधान रानी त्रिवेदी, उनके पति बिनोद त्रिवेदी, ग्राम पंचायत के अनेक सदस्य व उनके समर्थकों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और खुली बैठक से बाहर चले गये।
राम शंकर चुनाव की माँग पर अड़े रहे, लेकिन जब उनकी माँग नहीं मानी गयी तो राम शंकर समेत ग्राम प्रधान रानी त्रिवेदी, उनके पति बिनोद त्रिवेदी, ग्राम पंचायत के अनेक सदस्य व उनके समर्थकों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और खुली बैठक से बाहर चले गये।
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राम शंकर के चले जाने के बाद जब खुली बैठक में केवल एक दावेदार विशाल व उनके समर्थक बचे तब चयन प्रक्रिया शुरू की गयी। इसके लिए मौके पर मौजूद विशाल समर्थकों की गणना कराई गई। मौजूद रहे 316 लोगों ने विशाल को कोटा दिये जाने का समर्थन किया। बाद में नायब तहसीलदार ने अपनी निगरानी में ग्राम पंचायत अधिकारी से बैठक की आख्या लिखवाई, जिसमे विशाल को कोटा आवंटित किये जाने का प्रस्ताव भी है। इस खुली बैठक की कार्यवाही, एडीओ पंचायत ने भी ग्राम पंचायत अधिकारी से पंचायत की उस कार्यवाही पंजिका में दर्ज कराई जिसमें, बैठक में आये लोगों से पहले ही हस्ताक्षर करा लिए गये थे।
बैठक छोड़कर बाहर गये ग्राम प्रधान पक्ष के लोगों ने इस बैठक को विधि विरुद्ध बताया और प्रशासन से माँग की है कि मलिकमऊ चौबारा में कोटेदार की नियुक्ति के लिए चुनाव प्रक्रिया अपनाई जाय।
बैठक छोड़कर बाहर गये ग्राम प्रधान पक्ष के लोगों ने इस बैठक को विधि विरुद्ध बताया और प्रशासन से माँग की है कि मलिकमऊ चौबारा में कोटेदार की नियुक्ति के लिए चुनाव प्रक्रिया अपनाई जाय।



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