लखनऊ। श्री कृष्ण जन्माष्टमी 30 को मनाया जायेगा और हर घर में जन्मेंगे भगवान कृष्ण और माखन, मिश्री व मलाई का लगेगा भोग। पंचगव्य से भगवान का स्नान कराया जायेगा। सोलह कलाओं वाले श्री कृष्ण का जन्म धर्म का जन्म माना जाता है। कहा जाता है कि कृष्ण के जन्म के बाद धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो जाता है।
पंड़ित जतिन त्रिपाठी ने बताया कि माना जाता है कि श्री कृष्ण की सोलह कला में धन संपदा, भूअचल संपत्ति, कीर्ति यश सिद्धि, की सम्मोहकता, लीला आनंद उत्सव, कांति सौंदर्य और आभा, विद्या मेधा बुद्धि, विमला पारदर्शिता, प्ररेणा और नियोजन, ज्ञान नीर और विवेक, क्रिया कर्मण्यता, योग चित्तलय, प्रहवि- अत्यंतिक विनय, सत्य यथार्थ, इसना आधिपत्य व अनुग्रह उपकार के घोतक हैं।
हजरतगंज स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मदिंर के आचार्य अनुज त्रिपाठी ने बताया कि मध्यरात्रि 12 बजे से स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान श्री कृष्ण को घंटा और शंख ध्वनि करते हुए पंचामृत से स्नान कराएं। उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत धारण कराएं । चंदन और अक्षत चढाएं, पुष्प और इत्र चढ़ाएं। धूप, दीप दिखाए और तुलसी, मक्खन, मिश्री , पंजीरी और नैवैद्य का भोग व ऋतुफल चढ़ाए। लौंग , इलायची व पान अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण के मंत्र जप या स्त्रोत का पाठ करें और कपूर से आरती करें और सुख-समृद्धि व मनोकामना की प्रार्थना करें। अंत में पूजन में जाने अनजाने में हुए गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
आतिशबाजी के साथ होगा श्रीकृष्ण का जन्म श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। हजरतगंज हनुमान मंदिर के पुजारी ने बताया कि हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी होती है। इस दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण का जन्म हुआ था इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व 30 अगस्त को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 अगस्त को रात 11:25 बजे से होगी और 31 अगस्त को दोपहर 1:59 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत 30 अगस्त को सुबह 6:39 बजे होगी और 31 अगस्त को सुबह 9: 44 बजे तक पूजन का मान होगा। 30 अगस्त की रात 11.59 बजे से 12.44 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है।
उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, तो इस बार भी जन्माष्टमी पर कृष्ण जी के जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी। इसके अलावा वृष राशि में चंद्रमा रहेगा। ऐसा दुर्लभ संयोग होने से इस जन्माष्टमी का महत्व कहीं ज्यादा बढ़ गया है। इस दौरान श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।



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